स्वार्थी कुँआ
गए थे कुँए के पास, प्यास बुझाने को
क्योकि कुँआ ही था एक जरिया प्यास बुझाने का
लेकिन कुँआ तो प्यासा था
सोचा जो खुद ही प्यासा हो वह दूसरों की प्यास क्या बुझायेगा ।
लेकिन बात ऐसे कुँए की है , जो प्यासा था बस अपने मतलब के लिए ।
मतलब उसका पूरा होता तो मुझको वो पानी देता ।
लेकिन पहले पानी का झांसा देकर, उसने मुझको प्यासा छोड़ दिया ।
प्यासा हूँ लेकिन प्यास से बेहाल नहीं,
सोचता हूँ कभी कुँआ भी बेहाल हुआ होगा, इसलिए उसने मुझे प्यासा छोड़ दिया होगा ।
लेकिन ऐसा न था , कुँए के पास पानी था ।
बस दिखने के लिए ही प्यासा था वह ।
इसलिए कहता हूँ दोस्तों, ऐसे कुओं से दूर ही रहना ।
क्योकि ये दिखाने के लिए ही कुँए हैं ।
बात तो यह सच है कि इनका कोई अस्तित्व ही नहीं ।
खुद को महान समझते हैं यही इनकी बड़ी भूल है ।
दोस्तों इनसे दूर रहोगे तो कुछ बन जाओगे, नहीं तो ये तुमको खुद में ही मिलाकर
अपने जैसा ही एक कुँआ बना देंगे ।
जो बस प्यासे को पानी देता है बस अपनी प्यास बुझाने के लिए ।
दोस्तों ऐसे कुँओं की कमी नहीं इस संसार में ।
इसलिए इन कुओं की संख्या में बढ़ोत्तरी मत करना ।
लेकिन तुम्हे भी एक कुँआ बनना है, ऐसा कुँआ जो निस्वार्थ प्यासों कि प्यास बुझाता है ।
No comments:
Post a Comment