Wednesday, January 1, 2014

दिल का दर्द

धरती को समुद्र की चाह नहीं थी
फूलों को काँटों की चाह नहीं थी
दिल इस कदर  टूट गया इस इश्क के बाजार में
 जैसे मोहब्बत को  बेवफाई की चाह नहीं थी 

दिल में प्यार का एहसास नहीं हुआ
लवों पे हँसी का एहसास नहीं हुआ 
 आँखों को नमी का एहसास नहीं हुआ 
तेरे दिल ने ऐसी बेवफाई की मेरे दिल से
जिन्दगी को मौत का एहसास नहीं हुआ 

दर्द इस कदर बढ़ गया कि आँखें पथरा सी  गयी
जिन्दगी इस कदर उलझ  गयी कि  साँस थम सी गई
ख़ुशी को आने का रास्ता न मिल सका
लवों की हँसी इस कदर थम सी गयी 

गम के  साये में कब तक  मातम मनाते रहें 
झूठ के साये में कब तक जिन्दगी बिताते रहें
जिंदगी को भी मौत का इंतजार नहीं रहा
 फिर किस आस पे ख़ुशी को अपना बनाते रहें

                                                    अराधना कुलश्रेष्ठ