Sunday, February 23, 2014

स्वार्थी कुँआ

 गए थे कुँए के पास, प्यास बुझाने को

क्योकि कुँआ ही था एक जरिया प्यास बुझाने का

लेकिन कुँआ तो  प्यासा था

सोचा  जो खुद ही प्यासा हो वह दूसरों की प्यास क्या बुझायेगा ।

लेकिन बात ऐसे कुँए की है , जो प्यासा था बस अपने मतलब के लिए ।

मतलब उसका पूरा होता तो मुझको वो पानी देता ।

लेकिन पहले पानी का झांसा देकर, उसने मुझको प्यासा छोड़ दिया ।

प्यासा हूँ लेकिन प्यास से बेहाल नहीं,

सोचता हूँ कभी कुँआ  भी बेहाल हुआ होगा, इसलिए उसने मुझे प्यासा छोड़ दिया होगा ।

लेकिन ऐसा न था , कुँए  के पास पानी था ।

बस दिखने के लिए ही प्यासा था वह ।

इसलिए कहता हूँ दोस्तों, ऐसे कुओं से दूर ही रहना ।

क्योकि ये दिखाने के लिए ही कुँए हैं ।

बात  तो यह सच है कि इनका कोई अस्तित्व ही नहीं ।

खुद को महान समझते हैं यही इनकी बड़ी भूल है ।

दोस्तों इनसे दूर रहोगे तो कुछ बन जाओगे, नहीं तो ये तुमको खुद में ही मिलाकर

अपने  जैसा ही एक कुँआ  बना देंगे ।

जो बस प्यासे को पानी देता है बस अपनी प्यास बुझाने के लिए ।

दोस्तों ऐसे कुँओं  की कमी नहीं इस संसार में ।

इसलिए इन कुओं की  संख्या में बढ़ोत्तरी मत करना ।

लेकिन तुम्हे भी एक कुँआ बनना है,  ऐसा कुँआ जो निस्वार्थ प्यासों कि प्यास बुझाता है ।



  • पंकज कुलश्रेष्ठ
    सन २००१ 

Wednesday, January 1, 2014

दिल का दर्द

धरती को समुद्र की चाह नहीं थी
फूलों को काँटों की चाह नहीं थी
दिल इस कदर  टूट गया इस इश्क के बाजार में
 जैसे मोहब्बत को  बेवफाई की चाह नहीं थी 

दिल में प्यार का एहसास नहीं हुआ
लवों पे हँसी का एहसास नहीं हुआ 
 आँखों को नमी का एहसास नहीं हुआ 
तेरे दिल ने ऐसी बेवफाई की मेरे दिल से
जिन्दगी को मौत का एहसास नहीं हुआ 

दर्द इस कदर बढ़ गया कि आँखें पथरा सी  गयी
जिन्दगी इस कदर उलझ  गयी कि  साँस थम सी गई
ख़ुशी को आने का रास्ता न मिल सका
लवों की हँसी इस कदर थम सी गयी 

गम के  साये में कब तक  मातम मनाते रहें 
झूठ के साये में कब तक जिन्दगी बिताते रहें
जिंदगी को भी मौत का इंतजार नहीं रहा
 फिर किस आस पे ख़ुशी को अपना बनाते रहें

                                                    अराधना कुलश्रेष्ठ